मेरे घर की खिड़की से आजकल ठंडी हवा आती है
लगता है शहर में कोई तूफ़ान आनेवाला है
लगता है शहर में कोई तूफ़ान आनेवाला है
एक नई तारीख़ से पुरानी आवाज़ उठनेवाली है
लगता है तख़्तों-ताज की शामत आई है
लगता है तख़्तों-ताज की शामत आई है
राम की धरती से इंकलाब की धूल उड़ी है
मुल्क़ की गलियां भी अब कुरुक्षेत्र लगती हैं
मुल्क़ की गलियां भी अब कुरुक्षेत्र लगती हैं
समंदर की लहरों में भी आफ़त की आहट है
अब ये जनता कामयाबी की राह पर निकली है
अब ये जनता कामयाबी की राह पर निकली है
मेरे घर की खिड़की से आजकल ठंडी हवा आती है
लगता है शहर में कोई तूफ़ान आनेवाला है
लगता है शहर में कोई तूफ़ान आनेवाला है

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