गुड़गांव के बादशाह खान अस्पताल में एक बच्चा है। इसके हाथों में चोट लगी हुई है। उसके पिता ने उसे कूड़े में फेंका और चले गए। ये सोचे बिना कि इस बच्चे का आगे क्या होगा। उसी के दर्द पर ये एक छोटी सी कविता है
मुझसे वो मेरा नसीब ले गया
खामोश ज़िंदगी अजीब दे गया
कहते हैं वक़्त बदलता है
इंसान बदलता है
तू जो बदला
सब कुछ बदल गया
हालात बदल गए
विचार बदल गए
तकदीर बदल गई
हाथों की लकीर बदल गई
नहीं बदली
उस ज़ख़्म की ताज़गी
तेरी याद सालती है
हर पल आज भी
वो जो दर्द है
ज़ब्त है दिल में
संभालकर रखा है
तेरे इंतज़ार में
पर वो भरोसा अब टूटने लगा है
सब्र का वो भरम छूटने लगा है
तू लौटेगा की नहीं
तू लौटेगा की नहीं
मुझसे वो मेरा नसीब ले गया
खामोश ज़िंदगी अजीब दे गया
कहते हैं वक़्त बदलता है
इंसान बदलता है
तू जो बदला
सब कुछ बदल गया
हालात बदल गए
विचार बदल गए
तकदीर बदल गई
हाथों की लकीर बदल गई
नहीं बदली
उस ज़ख़्म की ताज़गी
तेरी याद सालती है
हर पल आज भी
वो जो दर्द है
ज़ब्त है दिल में
संभालकर रखा है
तेरे इंतज़ार में
पर वो भरोसा अब टूटने लगा है
सब्र का वो भरम छूटने लगा है
तू लौटेगा की नहीं
तू लौटेगा की नहीं

